गुरुवार, 30 सितंबर 2010
मंगलवार, 28 सितंबर 2010
शुक्रवार, 24 सितंबर 2010
बुधवार, 22 सितंबर 2010
सोमवार, 13 सितंबर 2010
इंदौर. तमाम तरह की जांच करवाने के बाद भी जब कमल पटेल की बीमारी पकड़ में नहीं आई तो 21 दिन बाद शुक्रवार शाम उन्हें जेल भेज दिया गया। अब पटेल को डिप्रेशन का मरीज बताकरभर्ती करवाने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार भंडारी अस्पताल प्रबंधन ने जो पत्र भेजा है उसमें पटेल के डिप्रेशन में होने की बात भी कही गई है। डिस्चार्ज के पहले डॉ. वी.एस.पाल और डॉ. आशीष पटेल इलाज कर रहे थे। पत्र मिलने के बाद प्रभारी अधीक्षक डॉ. वी.एस. पाल ने अधीनस्थों की मीटिंग बुलवाई।नियमों को लेकर भी उलझन रही, क्योंकि कोरोनरी एंजियोग्राफी के लिए भेजते समय पटेल को डिस्चार्ज किया गया था। अब भंडारी अस्पताल से उन्हें एमवायएच नहीं ला सकते। वहीं देर शाम जिला जेलर श्यामसिंह बघेल ने पुष्टि करते हुए कहा कि पटेल को जेल शिफ्ट कर दिया गया है। डिप्रेशन के इलाज के बारे में उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
कोर्ट के अगले निर्देश तक रिमांड
पटेल को 3 जून तक सीबीआई कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था। अस्पताल में भर्ती होने से जेल प्रशासन उन्हें कोर्ट में पेश नहीं कर पाया। इस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति ली थी। कोर्ट ने 7 जून तक पटेल की मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी।
7 जून को जेल प्रशासन ने कहा रिपोर्ट में वक्त लगेगा। इसके बाद जमानत याचिका खारिज हुई और उन्हें कोर्ट के अगले आदेश तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ेगा।
इंदौर. पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक कमल पटेल की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्यों को मिटाने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेजे गए पटेल की जमानत याचिका पर जस्टिस सुधा वाघमारे की कोर्ट में सुनवाई हुई।
पटेल के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले रामविलास जाट के वकील समीर वर्मा ने बताया कोर्ट ने आठ पेज के अपने आदेश में पटेल और राज्य सरकार की एजेंसियों पर भी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा मृतक की लाश अभी तक नहीं मिली और पटेल के खिलाफ जांच जारी है, ऐसे में वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
पटेल ने पहले भी जांच प्रभावित करने की कोशिश की है। हाई कोर्ट ने जबलपुर बेंच के उस आदेश का उल्लेख भी किया जिसमें जांच में राज्य की एजेंसियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने का हवाला दिया गया है।
इंदौर & कोरोनरी एंजियोग्राफी के नाम पर भंडारी अस्पताल में चार दिनों से भर्ती पूर्व मंत्री कमल पटेल को बुधवार को भी डिस्चार्ज नहीं किया गया। सीटी एंजियोग्राफी व अन्य जांच रिपोर्ट भी देर शाम एमवायएच प्रशासन को सौंपी गई। इसलिए बात अब गुरुवार तक टल गई। दिनभर कोई अधिकारी यह बताने को भी तैयार नहीं था कि पटेल को बीमारी है या नहीं? रविवार से लेकर मंगलवार तक भंडारी अस्पताल में डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी, लिपिड प्रोफाइल, इको, टीएमटी, एंडोस्कोपी व सामान्य ब्लड की जांचें करवाई जबकि इन जांचों के लिए पटेल को भेजा ही नहीं गया था। सीटी एंजियोग्राफी को छोड़कर सारी जांचें एमवायएच में हो चुकी थीं। ये रिपोर्ट बुधवार सुबह जेल और एमवायएच प्रशासन को दी जाना थी लेकिन दोपहर तक अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट नहीं मिली। अचानक शाम को एमवायएच अधीक्षक कार्यालय में मीटिंग बुलवाई गई ताकि पटेल की बीमारी को लेकर किसी निर्णय पर पहुंचा जा सके। ऐनमौके पर अस्पताल प्रशासन ने गेंद मेडिसिन विभाग के पाले में डाल दी। अब पटेल की रिपोर्ट पर मेडिसिन विभाग के डॉक्टर अपना मत देंगे। इसलिए बात गुरुवार तक टल गई है। डॉक्टरों की राय के बाद तय होगा कि पटेल का आगे इलाज किया जाए या नहीं? इस बारे में एमवायएच अधीक्षक डॉ. सलिल भार्गव ने बताया पटेल के डिस्चार्ज को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है। मेडिसिन विभाग केे डॉक्टरों के सुझाव के बाद हम जेल प्रशासन को सूचना दे देंगे। जब सीटी एंजियोग्राफी के लिए भंडारी अस्पताल भेजने के बारे में पूछा तो उनका कहना था हमने कोरोनरी एंजियोग्राफी के लिए भेजा था।
भंडारी अस्पताल में की गई जांच के बारे में वे कुछ नहीं बोले। इस झमेले के बीच बुधवार को भी पटेल अरबिंदो इंस्टिट्यूट में भर्ती रहे। वहां दिनभर क्या जांच की गई, ये कोई नहीं बता पाया। सूत्रों के अनुसार जमानत याचिका केे इंतजार में इलाज के नाम पर लेटलतीफी की जा रही है।10/6/2010 क्यों करवा रहे हैं कमल पटेल की एंजियोग्राफी भास्कर न्यूज First Published 10:00[IST](08/06/2010)Last Updated 10:38 AM [IST](08/06/2010)इंदौर. कोर्ट ने कमल पटेल पर लगे आरोप को गंभीर मानते हुए पहले न्यायिक हिरासत में जेल भेजा और फिर बेटे की शादी में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी मगर अस्पताल में वह अपने राजनीतिक दबाव का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। 15 दिन में बीमारी का पता नहीं लग पाना और अब रिपोर्ट बदलने की बात पर अस्पताल प्रशासन का गोलमोल जवाब इसी ओर इशारा करता है। पटेल की बीमारी को लेकर मामला उलझता ही जा रहा है। एमवायएच में तीन बार मेडिकल बोर्ड ने पटेल का परीक्षण किया। दूसरी बार परीक्षण के समय बीमारी समझ नहीं आने पर जब पटेल सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे, तब से ही एंजियोग्राफी की बात सामने आई थी। अब एक और नई बात सामने आई, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मेडिकल बोर्ड ने सीटी एंजियोग्राफी के लिए लिखा था न कि एंजियोग्राफी। सीटी एंजियोग्राफी एमवाय में भी होती है। सोमवार को एमवाय में दिनभर इसी बात पर चर्चा होती रहीं।
दरअसल मेडिकल बोर्ड परीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन यही बताता रहा कि एंजियोग्राफी के लिए जेल प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है। कागजी खानापूर्ति में देरी का हवाला देते हुए छह दिन बिता दिए। तीसरी बार मेडिकल बोर्ड ने क्या जांचें लिखीं, इसे भी गोपनीयता का हवाला देते हुए सार्वजनिक नहीं किया।
ये है सीटी एंजियोग्राफी
> सीटी एंजियोग्राफी में मरीज के हार्ट व आसपास के छोटे-छोटे हिस्सों में एक्स-रे लिए जाते हैं। इसके पहले अन्य किसी जांच की जरूरत नहीं होती।
> कोरोनरी एंजियोग्राफी में कैथलैब में डाई डालकर देखा जाता है कि दिल की किस धमनी में रुकावट आ रही है।
उठे सवाल
> दूसरी बार मेडिकल बोर्ड ने सीटी एंजियोग्राफी लिखी या एंजियोग्राफी? टीएमटी, इको और लिपिड प्रोफाइल जांच तो एमवाय में करवाई जा चुकी है।
> क्या एंजियोग्राफी के लिए मरीज को दो दिन भर्ती रखते है? डॉक्टरों के अनुसार एंजियोग्राफी में भी अधिक से अधिक 15 से 20 घंटे लगते हैं। इसके बाद 3 से 4 घंटे मरीज की निगरानी रखी जाती है।
ये डॉक्टर थे मेडिकल बोर्ड में
दूसरी बार मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने सिटी एंजियोग्राफी का सुझाव दिया था। इस बोर्ड में मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. जी.बी. रामटेके, सर्जरी विभाग विभाग से डॉ. सुमित शुक्ला और हड्डी रोग विभाग से डॉ. लक्ष्मण बनोधा शामिल थे।
नहीं हुई एंजियोग्राफी
विजयनगर स्थित भंडारी अस्पताल में एंजियोग्राफी के लिए भर्ती पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल की सोमवार को भी एंजियोग्राफी नहीं हो पाई। डॉक्टरों ने पूरा दिन लिपिड प्रोफाइल, इको और टीएमटी जांच करवाने में बिता दिया। ये सभी वही जांच है जो एमवाय अस्पताल में डॉक्टर करवा चुके हैं। सुबह से शाम तक जांच होती रही,
डिप्रेशन में है पटेल : दिल के बाद डॉक्टरों ने दिमाग की बीमारी बताई, दो बार मनोरोग विशेषज्ञों से जांच भी कराई जा चुकी है और दोनों ही बार डॉक्टर ने डिप्रेशन में होना बताया था। हालांकि डिप्रेशन की बात पर अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। न ही यह बताने को तैयार है कि पटेल किस तरह के डिप्रेशन के शिकार हैं। इस बारे में डॉ. वी.एस. पाल से पूछने पर वे सहम गए। और बचते-बचाते बोले कि मरीज की बीमारी पर बात नहीं करूंगा। इस मरीज के बारे में तो बिल्कुल भी नहीं बता सकता।
ञ्चमेडिकल बोर्ड ने सिटी एंजियोग्राफी और कोरोनल एंजियोग्राफी में से मरीज की तबीयत के अनुसार बेहतर विकल्प के लिए लिखा था। कोरोनरी एंजियोग्राफी बेहतर है। इसलिए यह करवाई जा रही है।
डॉ. वी.एस. पाल, प्रभारी एमवाय अस्पतालदुर्गेश हत्याकांड : फिर हुई कमल पटेल की जांचNeeta SisodiaFirst Published 00:00(17:3//[IST])Last Updated 5:39 PM [IST](07/06/2010)
इंदौर. चर्चित दुर्गेश हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के आरोपी पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल की भंडारी अस्पताल में इंजियोग्राफी को लेकर कई जांचें की गईं। श्री पटेल पिछले कई दिनों से एमवाय अस्पताल में भर्ती थे। रविवार को ही उन्हें भंडारी अस्पताल शिफ्ट किया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने आज उनकी ईको, टीएमटी और लिक्विड प्रोफाइल आदि जांचें फिर से करवार्इं। हालांकि, ये सारी जांच एमवाय अस्पताल में पहले भी करवाई जा चुकी हैं। एंजियोग्राफी को लेकर भंडारी अस्पताल के प्रशासक डॉ. बी.एल. भटनागर का कहना है कि शाम तक तय होगा कि यह करवाई जाए या नहीं।
एंजियोग्राफी के लिए पटेल को भंडारी अस्पताल भेजा
Bhaskar NewsFirst Published 07:00[IST](07/06/2010)Last Updated 7:36 AM [IST](07/06/2010)
patelइंदौर. बेटे की शादी वाले दिन रविवार को आखिरकार पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल को एंजियोग्राफी के लिए विजयनगर स्थित भंडारी अस्पताल शिफ्ट किया गया। सुबह 11.30 बजे पटेल को एमवाय अस्पताल से ले जाते समय काफी गहमागहमी रही।
हत्या के साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार पटेल की एंजियोग्राफी को लेकर काफी समय से माथापच्ची हो रही है। एमवायएच में भर्ती पटेल का मेडिकल बोर्ड तीन बार परीक्षण कर चुका है। मेडिकल बोर्ड ने दूसरी बार स्वास्थ्य परीक्षण करने के दौरान पटेल द्वारा सीने में दर्द की शिकायत करने पर एंजियोग्राफी जांच करवाने के लिए कहा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच की अनुमति के लिए जेल प्रशासन को पत्र लिखा था आठ दिनों से मामला टल रहा था। इस बीच जेल प्रशासन ने भंडारी अस्पताल से बात कर अनुमति दे दी। हालांकि रविवार को ही पटेल के बेटे की उज्जैन में शादी है और शादी वाले दिन ही पटेल को भंडारी अस्पताल में शिफ्ट करने को लेकर दिनभर चर्चाएं होती रही।
पूरा दिन आराम किया
पटेल को भंडारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन जांच नहीं हो पाई। पूरा दिन उन्होंने आराम किया। वैसे सामान्य रूप से किसी मरीज की एंजियोग्राफी में तीन-चार घंटे लगते हैं। डॉक्टरों के अनुसार सुबह एंजियोग्राफी की जाए तो भी शाम तक डिस्चार्ज किया जा सकता है।
पटेल की एंजियोग्राफी इसलिए नहीं की गई क्योंकि डॉक्टरों के अनुसार भूखे पेट जांच होती है। उसके बाद एंजियोग्राफी की जाती है। इसलिए रविवार को नहीं की गई। अस्पताल के प्रशासक डॉ. बी.एल. भटनागर ने बताया कि सोमवार को एंजियोग्राफी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार जानबूझकर रविवार का दिन टाला गया है। जब एमवायएच के डॉक्टरों को इस बारे में पता था तो फिर भूखे पेट आरोपी को क्यों नहीं भेजा।
फिर पटेल की बीमारी नहीं समझ पाए डॉक्टर
भास्कर न्यूज़First Published 03:00[IST](05/06/2010)Last Updated 3:21 AM [IST](05/06/2010)इंदौर. एमवायएच में इलाज करवा रहे हरदा विधायक और पूर्व मंत्री कमल पटेल की बीमारी की जानकारी अदालत द्वारा मांगे जाने से डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है। संभवत: इसके मद्देनजर शुक्रवार को तीसरी बार मेडिकल बोर्ड ने पटेल का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
इस बार भी एक घंटा डॉक्टरों ने जांच की लेकिन कोई ठोस बीमारी का पता नहीं लगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस झमेले से बचने के लिए बोर्ड ने मनोरोग विशेषज्ञ से भी राय लेने का मन बनाया है। इसके पहले भी पटेल का दो बार मेडिकल बोर्ड से जांच हो चुकी है। इससे शंका है कि पटेल को कोई बीमारी है भी या नहीं।
तीसरी बार मेडिकल बोर्ड हुआ, क्या बीमारी है पटेल को?मेडिकल बोर्ड ने परीक्षण कर उपचार लिख दिया है। बीमारी के बारे में हम सिर्फ कोर्ट को बताएंगे।डॉक्टरों को बीमारी क्यों समझ नहीं आ रही?नहीं,उन्हें कई बीमारियां हैं और उनका उपचार भी किया जा रहा हैमनोरोग विशेषज्ञ ने लिखा है कि पटेल डिप्रेशन में हैं?
नहीं, इस बारे में कुछ नहीं बता सकता लेकिन वे मनोरोगी हैं। डॉक्टर ने यूनिट के डॉक्टरों को पटेल की बीमारी के बारे में बता दिया है। उसके अनुसार इलाज किया जाएगा।(एमवायएच अधीक्षक डॉ. सलिल भार्गव से सीधी बात)दुर्गेश हत्याकांड:मनोरोगी हो गए हैं कमल पटेल!Neeta SisodiaFirst Published 00:00(17:2//[IST])Last Updated 6:28 PM [IST](01/06/2010)इंदौर. कयास लगाए जा रहे हैं कि दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के आरोपी हरदा विधायक कमल पटेल मानसिक रोगी हो गए हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि मनोरोग चिकित्सकों ने आज उनकी जांच की है। वहीं इस जांच से एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों पर सवालिया निशान उठने लगे हैं, क्योंकि बिना मेडिकल बोर्ड की अनुमति के ही जांच की गई है और उनकी एंजियोग्राफी को लेकर जमकर टालमटोल की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले शुक्रवार को कोई बीमारी समझ में न आने के कारण मेडिकल बोर्ड ने उनकी एंजियोग्राफी के लिए लिखा था, लेकिन चार दिन बाद भी यह जांच कागजी खानापूर्ति का बहाना बनाकर टाली जा रही है। मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि जांच महंगी है और इसके लिए जेल प्रशासन की अनुमति भी चाहिए। वहीं दूसरी ओर सोमवार को मनोरोग विशेषज्ञ को श्री पटेल की जांच के लिए भेज दिया गया। नियमों के अनुसार जब भी कैदी या इस तरह के किसी आरोपी का परीक्षण किया जाता है तो बाकायदा एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है। बोर्ड में उसी विभाग के डॉक्टरों का पैनल रहता है। मामले को लेकर जब मनोरोग विभाग से संपर्क किया गया तो विभाग के अधिकारी पल्ला झाडऩे की कोशिश करते रहे।
पटेल की जमानत अर्जी पर हाई कोर्ट में आपत्ति
भास्कर न्यूज़First Published 02:00[IST](01/06/2010)Last Updated 2:22 AM [IST](01/06/2010)इंदौर. पूर्व मंत्री कमल पटेल की जमानत अर्जी पर दुर्गेश जाट के पिता ने हाई कोर्ट में आपत्ति पेश कर जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की है। सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद पटेल 3 जून तक न्यायिक हिरासत में हैं।
यद्यपि फिलहाल वे इलाज के लिए एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं। जिला अदालत द्वारा पटेल की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दायर की गई है जिस पर हाई कोर्ट ने सीबीआई को केस डायरी पेश करने को कहा है।
उधर, दुर्गेश के पिता रामविलास की ओर से अधिवक्ता समीर वर्मा ने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर जमानत अर्जी निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है जमानत मिलने पर पटेल द्वारा शेष साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए जाएंगे। जमानत अर्जी के संदर्भ में संभवत: 7 जून को बहस हो सकती है।
हत्याकांड में फंसे भाजपा विधायक कमल पटेल की याचिका खारिज
Nikhil SuryavanshiFirst Published 05:00(15:1//[IST])Last Updated 7:25 PM [IST](24/05/201इंदौर. हरदा में कोई सवा दो साल पहले हुए दुर्गेश जाट की गैर इरादतन हत्या के साक्ष्य छिपाने के आरोप में प्रदेश के पूर्व राजस्व मंत्री एवं हरदा के वर्तमान विधायक कमल पटेल की जमानत अर्जी जिला अदालत ने खारीज कर दी। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को हुई पेशी में विशेष अदालत ने श्री पटेल को 3 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे। उसके बाद से वे तबीयत खराब होने से एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं।
विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) आरके जोशी ने शनिवार दोपहर इस तर्क के साथ जमानत अर्जी खारीज कर दी कि पूर्व में अन्य आरोपियों को जिन आधारों पर जमानत मिली, वह बात अलग है। पटेल उस वक्त मंत्री थे और उन्होंने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए साक्ष्य छिपाए। इस कारण पुलिस ने जांच में रुचि नहीं ली जिससे जांच प्रभावित हुई है। यह गंभीर किस्म का मामला है और इसमें उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। बताया जा रहा है अब पटेल जमानत के लिए हाई कोर्ट में गुहार लगाएंगे।
मप्र के पूर्व मंत्री कमल पटेल गिरफ्तार
Bhaskar NewsFirst Published 06:00[IST](21/05/2010)Last Updated 9:50 AM [IST](21/05/2010)kamal patelभोपाल. सीबीआई लखनऊ की टीम ने गुरुवार रात पूर्व मंत्री और हरदा के भाजपा विधायक कमल पटेल को गिरफ्तार कर लिया। इसके पूर्व भेल के नर्मदा गेस्ट हाउस में उनसे लंबी पूछताछ हुई। पटेल पर दुर्गेश जाट प्रकरण में षडच्यंत्र रचने और साक्ष्य छुपाने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम सुबह पटेल के चार इमली स्थित आवास पहुंची। वहां से उन्हें पूछताछ के लिए पहले नर्मदा गेस्ट हाउस ले जाया गया। लंबी पूछताछ के बाद रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्र बताते हैं कि पूछताछ के दौरान पटेल ने सीबीआई अफसरों से काफी बहस की।
पटेल को दुर्गेश जाट मामले में षडच्यंत्र रचने और साक्ष्य छुपाने का आरोपी बनाया गया है। बताया जाता है कि कमल पटेल को शुक्रवार को इंदौर की अदालत में पेश किया जाएगा। मप्र हाईकोर्ट के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच सीबीआई की लखनऊ टीम कर रही है।
दो साल पुराना मामला : कांग्रेस नेता राजेंद्र पटेल से कमल पटेल के बेटे सुदीप और दुर्गेश का 5 मार्च 2008 को विवाद हो गया था। इसके बाद सुदीप अपने दोस्तों के साथ राजेंद्र के घर जा धमका। वहां गहमागहमी के बीच गोली चल गई। इस घटना के बाद से सुदीप का मित्र दुर्गेश लापता है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुदीप पटेल व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। इसके पूर्व सीबीआई टीम कई बार हरदा और भोपाल में पटेल के पुत्र से पूछताछ कर चुकी है।
पटेल समर्थकों ने फिर किया चक्काजाम
विधायक कमल पटेल के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी के विरोध में एक बार फिर रविवार को चक्काजाम कर दिया। पटेल समर्थको ने हरदा-खंडवा स्टेट हाईवे पर मांदला बाजार में बीच सड़क पर खड़े होकर आवागमन रोक दिया। सड़क पर भाजपाइयों के खड़े होने से वाहनों के पहिए थम गए। दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। करीब आधा दर्जन गांवों के १५०-२०० भाजपाइयों ने सीबीआई द्वारा श्री पटेल की गिरफ्तारी को राजनैतिक वैमनस्यता भरी कार्रवाई बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की।
भाजपाइयों के चक्काजाम करने की सूचना हरदा पुलिस को मिली और यहां से पुलिस बल रवाना किया गया। इस बीच खिरकिया तहसीलदार को सूचना मिली तो वे तुरंत पहुंचे। तहसीलदार एके रिछारिया ने चक्काजाम कर रहे भाजपाइयों को समझाइश देते हुए कहा कि सीबीआई की कार्रवाई के विरोध के लिए ज्ञापन वे तुरंत राष्ट्रपति को भेजने की व्यवस्था करेंगे। उन्होंने भाजपाइयों से सड़क पर से हट जाने को कहा। ज्ञापन देने के बाद मांदला, बारंगी, बारंगा, बम्हनगांव, इबाला, खमलाय आदि गांवों से आए भाजपाई सड़क पर से हट गए। करीब १५ मिनट बाद आवागमन फिर चालू हुआ।
एमवायएच की ना से पटेल जेल में
इंदौर। 20 दिनों तक एमवाय में इलाज करवाने के बाद पटेल को एंजियोग्राफी के लिए भंडारी अस्पताल भेजा गया था। भंडारी हॉस्पिटल ने भी दो दिनों तक औपचारिक इलाज के बाद उन्हें अरबिंदो मेडिकल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सेम्स) भेज दिया था। बुधवार को जांच के बाद गुरुवार को रिपोर्ट एमवाय अस्पताल और जेल प्रशासन को भेजी गई थी।
इस रिपोर्ट को मेडिकल बोर्ड ने भी देखा और पटेल को स्वस्थ बताया। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को पटेल को जेल भेजने के पूर्व भंडारी अस्पताल प्रशासन ने एक औपचारिक पत्र लिखकर एमवाय प्रशासन से यह पूछा था कि क्या वे पटेल का इलाज या कोई जांच करना चाहते हैं। एमवाय अस्पताल द्वारा उत्तर में भेजे गए पत्र में ना कहते हुए यह भी लिखा गया कि हम पटेल का पूरा इलाज कर चुके हैं और अब उनकी किसी प्रकार की जांच बाकी नहीं है। पटेल एमवाय से डिस्चार्ज हो चुके हैं और अब उन्हें भर्ती करने का कोई औचित्य नहीं है।
कमल पटेल को आखिरकार शुक्रवार को जेल जाना पडा। हाल ही उनको हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी, कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। पटेल पर साक्ष्य छुपाने का आरोप है। सीबीआई ने दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के मामले में 19 मई को भोपाल से पटेल को गिरफ्तार किया था। उसके बाद पटेल को कोर्ट ने 3 जून तक सीआई जेल भेजने के आदेश दिए थे। उसी दिन से वह अस्पताल में भर्ती रहे।
सूत्रों के अनुसार भंडारी अस्पताल प्रबंधन ने जो पत्र भेजा है उसमें पटेल के डिप्रेशन में होने की बात भी कही गई है। डिस्चार्ज के पहले डॉ. वी.एस.पाल और डॉ. आशीष पटेल इलाज कर रहे थे। पत्र मिलने के बाद प्रभारी अधीक्षक डॉ. वी.एस. पाल ने अधीनस्थों की मीटिंग बुलवाई।नियमों को लेकर भी उलझन रही, क्योंकि कोरोनरी एंजियोग्राफी के लिए भेजते समय पटेल को डिस्चार्ज किया गया था। अब भंडारी अस्पताल से उन्हें एमवायएच नहीं ला सकते। वहीं देर शाम जिला जेलर श्यामसिंह बघेल ने पुष्टि करते हुए कहा कि पटेल को जेल शिफ्ट कर दिया गया है। डिप्रेशन के इलाज के बारे में उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
कोर्ट के अगले निर्देश तक रिमांड
पटेल को 3 जून तक सीबीआई कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था। अस्पताल में भर्ती होने से जेल प्रशासन उन्हें कोर्ट में पेश नहीं कर पाया। इस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति ली थी। कोर्ट ने 7 जून तक पटेल की मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी।
7 जून को जेल प्रशासन ने कहा रिपोर्ट में वक्त लगेगा। इसके बाद जमानत याचिका खारिज हुई और उन्हें कोर्ट के अगले आदेश तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ेगा।
इंदौर. पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक कमल पटेल की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्यों को मिटाने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेजे गए पटेल की जमानत याचिका पर जस्टिस सुधा वाघमारे की कोर्ट में सुनवाई हुई।
पटेल के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले रामविलास जाट के वकील समीर वर्मा ने बताया कोर्ट ने आठ पेज के अपने आदेश में पटेल और राज्य सरकार की एजेंसियों पर भी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा मृतक की लाश अभी तक नहीं मिली और पटेल के खिलाफ जांच जारी है, ऐसे में वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
पटेल ने पहले भी जांच प्रभावित करने की कोशिश की है। हाई कोर्ट ने जबलपुर बेंच के उस आदेश का उल्लेख भी किया जिसमें जांच में राज्य की एजेंसियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने का हवाला दिया गया है।
इंदौर & कोरोनरी एंजियोग्राफी के नाम पर भंडारी अस्पताल में चार दिनों से भर्ती पूर्व मंत्री कमल पटेल को बुधवार को भी डिस्चार्ज नहीं किया गया। सीटी एंजियोग्राफी व अन्य जांच रिपोर्ट भी देर शाम एमवायएच प्रशासन को सौंपी गई। इसलिए बात अब गुरुवार तक टल गई। दिनभर कोई अधिकारी यह बताने को भी तैयार नहीं था कि पटेल को बीमारी है या नहीं? रविवार से लेकर मंगलवार तक भंडारी अस्पताल में डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी, लिपिड प्रोफाइल, इको, टीएमटी, एंडोस्कोपी व सामान्य ब्लड की जांचें करवाई जबकि इन जांचों के लिए पटेल को भेजा ही नहीं गया था। सीटी एंजियोग्राफी को छोड़कर सारी जांचें एमवायएच में हो चुकी थीं। ये रिपोर्ट बुधवार सुबह जेल और एमवायएच प्रशासन को दी जाना थी लेकिन दोपहर तक अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट नहीं मिली। अचानक शाम को एमवायएच अधीक्षक कार्यालय में मीटिंग बुलवाई गई ताकि पटेल की बीमारी को लेकर किसी निर्णय पर पहुंचा जा सके। ऐनमौके पर अस्पताल प्रशासन ने गेंद मेडिसिन विभाग के पाले में डाल दी। अब पटेल की रिपोर्ट पर मेडिसिन विभाग के डॉक्टर अपना मत देंगे। इसलिए बात गुरुवार तक टल गई है। डॉक्टरों की राय के बाद तय होगा कि पटेल का आगे इलाज किया जाए या नहीं? इस बारे में एमवायएच अधीक्षक डॉ. सलिल भार्गव ने बताया पटेल के डिस्चार्ज को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है। मेडिसिन विभाग केे डॉक्टरों के सुझाव के बाद हम जेल प्रशासन को सूचना दे देंगे। जब सीटी एंजियोग्राफी के लिए भंडारी अस्पताल भेजने के बारे में पूछा तो उनका कहना था हमने कोरोनरी एंजियोग्राफी के लिए भेजा था।
भंडारी अस्पताल में की गई जांच के बारे में वे कुछ नहीं बोले। इस झमेले के बीच बुधवार को भी पटेल अरबिंदो इंस्टिट्यूट में भर्ती रहे। वहां दिनभर क्या जांच की गई, ये कोई नहीं बता पाया। सूत्रों के अनुसार जमानत याचिका केे इंतजार में इलाज के नाम पर लेटलतीफी की जा रही है।10/6/2010 क्यों करवा रहे हैं कमल पटेल की एंजियोग्राफी भास्कर न्यूज First Published 10:00[IST](08/06/2010)Last Updated 10:38 AM [IST](08/06/2010)इंदौर. कोर्ट ने कमल पटेल पर लगे आरोप को गंभीर मानते हुए पहले न्यायिक हिरासत में जेल भेजा और फिर बेटे की शादी में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी मगर अस्पताल में वह अपने राजनीतिक दबाव का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। 15 दिन में बीमारी का पता नहीं लग पाना और अब रिपोर्ट बदलने की बात पर अस्पताल प्रशासन का गोलमोल जवाब इसी ओर इशारा करता है। पटेल की बीमारी को लेकर मामला उलझता ही जा रहा है। एमवायएच में तीन बार मेडिकल बोर्ड ने पटेल का परीक्षण किया। दूसरी बार परीक्षण के समय बीमारी समझ नहीं आने पर जब पटेल सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे, तब से ही एंजियोग्राफी की बात सामने आई थी। अब एक और नई बात सामने आई, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मेडिकल बोर्ड ने सीटी एंजियोग्राफी के लिए लिखा था न कि एंजियोग्राफी। सीटी एंजियोग्राफी एमवाय में भी होती है। सोमवार को एमवाय में दिनभर इसी बात पर चर्चा होती रहीं।
दरअसल मेडिकल बोर्ड परीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन यही बताता रहा कि एंजियोग्राफी के लिए जेल प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है। कागजी खानापूर्ति में देरी का हवाला देते हुए छह दिन बिता दिए। तीसरी बार मेडिकल बोर्ड ने क्या जांचें लिखीं, इसे भी गोपनीयता का हवाला देते हुए सार्वजनिक नहीं किया।
ये है सीटी एंजियोग्राफी
> सीटी एंजियोग्राफी में मरीज के हार्ट व आसपास के छोटे-छोटे हिस्सों में एक्स-रे लिए जाते हैं। इसके पहले अन्य किसी जांच की जरूरत नहीं होती।
> कोरोनरी एंजियोग्राफी में कैथलैब में डाई डालकर देखा जाता है कि दिल की किस धमनी में रुकावट आ रही है।
उठे सवाल
> दूसरी बार मेडिकल बोर्ड ने सीटी एंजियोग्राफी लिखी या एंजियोग्राफी? टीएमटी, इको और लिपिड प्रोफाइल जांच तो एमवाय में करवाई जा चुकी है।
> क्या एंजियोग्राफी के लिए मरीज को दो दिन भर्ती रखते है? डॉक्टरों के अनुसार एंजियोग्राफी में भी अधिक से अधिक 15 से 20 घंटे लगते हैं। इसके बाद 3 से 4 घंटे मरीज की निगरानी रखी जाती है।
ये डॉक्टर थे मेडिकल बोर्ड में
दूसरी बार मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने सिटी एंजियोग्राफी का सुझाव दिया था। इस बोर्ड में मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. जी.बी. रामटेके, सर्जरी विभाग विभाग से डॉ. सुमित शुक्ला और हड्डी रोग विभाग से डॉ. लक्ष्मण बनोधा शामिल थे।
नहीं हुई एंजियोग्राफी
विजयनगर स्थित भंडारी अस्पताल में एंजियोग्राफी के लिए भर्ती पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल की सोमवार को भी एंजियोग्राफी नहीं हो पाई। डॉक्टरों ने पूरा दिन लिपिड प्रोफाइल, इको और टीएमटी जांच करवाने में बिता दिया। ये सभी वही जांच है जो एमवाय अस्पताल में डॉक्टर करवा चुके हैं। सुबह से शाम तक जांच होती रही,
डिप्रेशन में है पटेल : दिल के बाद डॉक्टरों ने दिमाग की बीमारी बताई, दो बार मनोरोग विशेषज्ञों से जांच भी कराई जा चुकी है और दोनों ही बार डॉक्टर ने डिप्रेशन में होना बताया था। हालांकि डिप्रेशन की बात पर अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। न ही यह बताने को तैयार है कि पटेल किस तरह के डिप्रेशन के शिकार हैं। इस बारे में डॉ. वी.एस. पाल से पूछने पर वे सहम गए। और बचते-बचाते बोले कि मरीज की बीमारी पर बात नहीं करूंगा। इस मरीज के बारे में तो बिल्कुल भी नहीं बता सकता।
ञ्चमेडिकल बोर्ड ने सिटी एंजियोग्राफी और कोरोनल एंजियोग्राफी में से मरीज की तबीयत के अनुसार बेहतर विकल्प के लिए लिखा था। कोरोनरी एंजियोग्राफी बेहतर है। इसलिए यह करवाई जा रही है।
डॉ. वी.एस. पाल, प्रभारी एमवाय अस्पतालदुर्गेश हत्याकांड : फिर हुई कमल पटेल की जांचNeeta SisodiaFirst Published 00:00(17:3//[IST])Last Updated 5:39 PM [IST](07/06/2010)
इंदौर. चर्चित दुर्गेश हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के आरोपी पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल की भंडारी अस्पताल में इंजियोग्राफी को लेकर कई जांचें की गईं। श्री पटेल पिछले कई दिनों से एमवाय अस्पताल में भर्ती थे। रविवार को ही उन्हें भंडारी अस्पताल शिफ्ट किया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने आज उनकी ईको, टीएमटी और लिक्विड प्रोफाइल आदि जांचें फिर से करवार्इं। हालांकि, ये सारी जांच एमवाय अस्पताल में पहले भी करवाई जा चुकी हैं। एंजियोग्राफी को लेकर भंडारी अस्पताल के प्रशासक डॉ. बी.एल. भटनागर का कहना है कि शाम तक तय होगा कि यह करवाई जाए या नहीं।
एंजियोग्राफी के लिए पटेल को भंडारी अस्पताल भेजा
Bhaskar NewsFirst Published 07:00[IST](07/06/2010)Last Updated 7:36 AM [IST](07/06/2010)
patelइंदौर. बेटे की शादी वाले दिन रविवार को आखिरकार पूर्व मंत्री और हरदा विधायक कमल पटेल को एंजियोग्राफी के लिए विजयनगर स्थित भंडारी अस्पताल शिफ्ट किया गया। सुबह 11.30 बजे पटेल को एमवाय अस्पताल से ले जाते समय काफी गहमागहमी रही।
हत्या के साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार पटेल की एंजियोग्राफी को लेकर काफी समय से माथापच्ची हो रही है। एमवायएच में भर्ती पटेल का मेडिकल बोर्ड तीन बार परीक्षण कर चुका है। मेडिकल बोर्ड ने दूसरी बार स्वास्थ्य परीक्षण करने के दौरान पटेल द्वारा सीने में दर्द की शिकायत करने पर एंजियोग्राफी जांच करवाने के लिए कहा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच की अनुमति के लिए जेल प्रशासन को पत्र लिखा था आठ दिनों से मामला टल रहा था। इस बीच जेल प्रशासन ने भंडारी अस्पताल से बात कर अनुमति दे दी। हालांकि रविवार को ही पटेल के बेटे की उज्जैन में शादी है और शादी वाले दिन ही पटेल को भंडारी अस्पताल में शिफ्ट करने को लेकर दिनभर चर्चाएं होती रही।
पूरा दिन आराम किया
पटेल को भंडारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन जांच नहीं हो पाई। पूरा दिन उन्होंने आराम किया। वैसे सामान्य रूप से किसी मरीज की एंजियोग्राफी में तीन-चार घंटे लगते हैं। डॉक्टरों के अनुसार सुबह एंजियोग्राफी की जाए तो भी शाम तक डिस्चार्ज किया जा सकता है।
पटेल की एंजियोग्राफी इसलिए नहीं की गई क्योंकि डॉक्टरों के अनुसार भूखे पेट जांच होती है। उसके बाद एंजियोग्राफी की जाती है। इसलिए रविवार को नहीं की गई। अस्पताल के प्रशासक डॉ. बी.एल. भटनागर ने बताया कि सोमवार को एंजियोग्राफी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार जानबूझकर रविवार का दिन टाला गया है। जब एमवायएच के डॉक्टरों को इस बारे में पता था तो फिर भूखे पेट आरोपी को क्यों नहीं भेजा।
फिर पटेल की बीमारी नहीं समझ पाए डॉक्टर
भास्कर न्यूज़First Published 03:00[IST](05/06/2010)Last Updated 3:21 AM [IST](05/06/2010)इंदौर. एमवायएच में इलाज करवा रहे हरदा विधायक और पूर्व मंत्री कमल पटेल की बीमारी की जानकारी अदालत द्वारा मांगे जाने से डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है। संभवत: इसके मद्देनजर शुक्रवार को तीसरी बार मेडिकल बोर्ड ने पटेल का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
इस बार भी एक घंटा डॉक्टरों ने जांच की लेकिन कोई ठोस बीमारी का पता नहीं लगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस झमेले से बचने के लिए बोर्ड ने मनोरोग विशेषज्ञ से भी राय लेने का मन बनाया है। इसके पहले भी पटेल का दो बार मेडिकल बोर्ड से जांच हो चुकी है। इससे शंका है कि पटेल को कोई बीमारी है भी या नहीं।
तीसरी बार मेडिकल बोर्ड हुआ, क्या बीमारी है पटेल को?मेडिकल बोर्ड ने परीक्षण कर उपचार लिख दिया है। बीमारी के बारे में हम सिर्फ कोर्ट को बताएंगे।डॉक्टरों को बीमारी क्यों समझ नहीं आ रही?नहीं,उन्हें कई बीमारियां हैं और उनका उपचार भी किया जा रहा हैमनोरोग विशेषज्ञ ने लिखा है कि पटेल डिप्रेशन में हैं?
नहीं, इस बारे में कुछ नहीं बता सकता लेकिन वे मनोरोगी हैं। डॉक्टर ने यूनिट के डॉक्टरों को पटेल की बीमारी के बारे में बता दिया है। उसके अनुसार इलाज किया जाएगा।(एमवायएच अधीक्षक डॉ. सलिल भार्गव से सीधी बात)दुर्गेश हत्याकांड:मनोरोगी हो गए हैं कमल पटेल!Neeta SisodiaFirst Published 00:00(17:2//[IST])Last Updated 6:28 PM [IST](01/06/2010)इंदौर. कयास लगाए जा रहे हैं कि दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के आरोपी हरदा विधायक कमल पटेल मानसिक रोगी हो गए हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि मनोरोग चिकित्सकों ने आज उनकी जांच की है। वहीं इस जांच से एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों पर सवालिया निशान उठने लगे हैं, क्योंकि बिना मेडिकल बोर्ड की अनुमति के ही जांच की गई है और उनकी एंजियोग्राफी को लेकर जमकर टालमटोल की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले शुक्रवार को कोई बीमारी समझ में न आने के कारण मेडिकल बोर्ड ने उनकी एंजियोग्राफी के लिए लिखा था, लेकिन चार दिन बाद भी यह जांच कागजी खानापूर्ति का बहाना बनाकर टाली जा रही है। मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि जांच महंगी है और इसके लिए जेल प्रशासन की अनुमति भी चाहिए। वहीं दूसरी ओर सोमवार को मनोरोग विशेषज्ञ को श्री पटेल की जांच के लिए भेज दिया गया। नियमों के अनुसार जब भी कैदी या इस तरह के किसी आरोपी का परीक्षण किया जाता है तो बाकायदा एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है। बोर्ड में उसी विभाग के डॉक्टरों का पैनल रहता है। मामले को लेकर जब मनोरोग विभाग से संपर्क किया गया तो विभाग के अधिकारी पल्ला झाडऩे की कोशिश करते रहे।
पटेल की जमानत अर्जी पर हाई कोर्ट में आपत्ति
भास्कर न्यूज़First Published 02:00[IST](01/06/2010)Last Updated 2:22 AM [IST](01/06/2010)इंदौर. पूर्व मंत्री कमल पटेल की जमानत अर्जी पर दुर्गेश जाट के पिता ने हाई कोर्ट में आपत्ति पेश कर जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की है। सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद पटेल 3 जून तक न्यायिक हिरासत में हैं।
यद्यपि फिलहाल वे इलाज के लिए एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं। जिला अदालत द्वारा पटेल की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दायर की गई है जिस पर हाई कोर्ट ने सीबीआई को केस डायरी पेश करने को कहा है।
उधर, दुर्गेश के पिता रामविलास की ओर से अधिवक्ता समीर वर्मा ने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर जमानत अर्जी निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है जमानत मिलने पर पटेल द्वारा शेष साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए जाएंगे। जमानत अर्जी के संदर्भ में संभवत: 7 जून को बहस हो सकती है।
हत्याकांड में फंसे भाजपा विधायक कमल पटेल की याचिका खारिज
Nikhil SuryavanshiFirst Published 05:00(15:1//[IST])Last Updated 7:25 PM [IST](24/05/201इंदौर. हरदा में कोई सवा दो साल पहले हुए दुर्गेश जाट की गैर इरादतन हत्या के साक्ष्य छिपाने के आरोप में प्रदेश के पूर्व राजस्व मंत्री एवं हरदा के वर्तमान विधायक कमल पटेल की जमानत अर्जी जिला अदालत ने खारीज कर दी। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को हुई पेशी में विशेष अदालत ने श्री पटेल को 3 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे। उसके बाद से वे तबीयत खराब होने से एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं।
विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) आरके जोशी ने शनिवार दोपहर इस तर्क के साथ जमानत अर्जी खारीज कर दी कि पूर्व में अन्य आरोपियों को जिन आधारों पर जमानत मिली, वह बात अलग है। पटेल उस वक्त मंत्री थे और उन्होंने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए साक्ष्य छिपाए। इस कारण पुलिस ने जांच में रुचि नहीं ली जिससे जांच प्रभावित हुई है। यह गंभीर किस्म का मामला है और इसमें उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। बताया जा रहा है अब पटेल जमानत के लिए हाई कोर्ट में गुहार लगाएंगे।
मप्र के पूर्व मंत्री कमल पटेल गिरफ्तार
Bhaskar NewsFirst Published 06:00[IST](21/05/2010)Last Updated 9:50 AM [IST](21/05/2010)kamal patelभोपाल. सीबीआई लखनऊ की टीम ने गुरुवार रात पूर्व मंत्री और हरदा के भाजपा विधायक कमल पटेल को गिरफ्तार कर लिया। इसके पूर्व भेल के नर्मदा गेस्ट हाउस में उनसे लंबी पूछताछ हुई। पटेल पर दुर्गेश जाट प्रकरण में षडच्यंत्र रचने और साक्ष्य छुपाने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम सुबह पटेल के चार इमली स्थित आवास पहुंची। वहां से उन्हें पूछताछ के लिए पहले नर्मदा गेस्ट हाउस ले जाया गया। लंबी पूछताछ के बाद रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्र बताते हैं कि पूछताछ के दौरान पटेल ने सीबीआई अफसरों से काफी बहस की।
पटेल को दुर्गेश जाट मामले में षडच्यंत्र रचने और साक्ष्य छुपाने का आरोपी बनाया गया है। बताया जाता है कि कमल पटेल को शुक्रवार को इंदौर की अदालत में पेश किया जाएगा। मप्र हाईकोर्ट के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच सीबीआई की लखनऊ टीम कर रही है।
दो साल पुराना मामला : कांग्रेस नेता राजेंद्र पटेल से कमल पटेल के बेटे सुदीप और दुर्गेश का 5 मार्च 2008 को विवाद हो गया था। इसके बाद सुदीप अपने दोस्तों के साथ राजेंद्र के घर जा धमका। वहां गहमागहमी के बीच गोली चल गई। इस घटना के बाद से सुदीप का मित्र दुर्गेश लापता है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुदीप पटेल व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। इसके पूर्व सीबीआई टीम कई बार हरदा और भोपाल में पटेल के पुत्र से पूछताछ कर चुकी है।
पटेल समर्थकों ने फिर किया चक्काजाम
विधायक कमल पटेल के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी के विरोध में एक बार फिर रविवार को चक्काजाम कर दिया। पटेल समर्थको ने हरदा-खंडवा स्टेट हाईवे पर मांदला बाजार में बीच सड़क पर खड़े होकर आवागमन रोक दिया। सड़क पर भाजपाइयों के खड़े होने से वाहनों के पहिए थम गए। दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। करीब आधा दर्जन गांवों के १५०-२०० भाजपाइयों ने सीबीआई द्वारा श्री पटेल की गिरफ्तारी को राजनैतिक वैमनस्यता भरी कार्रवाई बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की।
भाजपाइयों के चक्काजाम करने की सूचना हरदा पुलिस को मिली और यहां से पुलिस बल रवाना किया गया। इस बीच खिरकिया तहसीलदार को सूचना मिली तो वे तुरंत पहुंचे। तहसीलदार एके रिछारिया ने चक्काजाम कर रहे भाजपाइयों को समझाइश देते हुए कहा कि सीबीआई की कार्रवाई के विरोध के लिए ज्ञापन वे तुरंत राष्ट्रपति को भेजने की व्यवस्था करेंगे। उन्होंने भाजपाइयों से सड़क पर से हट जाने को कहा। ज्ञापन देने के बाद मांदला, बारंगी, बारंगा, बम्हनगांव, इबाला, खमलाय आदि गांवों से आए भाजपाई सड़क पर से हट गए। करीब १५ मिनट बाद आवागमन फिर चालू हुआ।
एमवायएच की ना से पटेल जेल में
इंदौर। 20 दिनों तक एमवाय में इलाज करवाने के बाद पटेल को एंजियोग्राफी के लिए भंडारी अस्पताल भेजा गया था। भंडारी हॉस्पिटल ने भी दो दिनों तक औपचारिक इलाज के बाद उन्हें अरबिंदो मेडिकल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सेम्स) भेज दिया था। बुधवार को जांच के बाद गुरुवार को रिपोर्ट एमवाय अस्पताल और जेल प्रशासन को भेजी गई थी।
इस रिपोर्ट को मेडिकल बोर्ड ने भी देखा और पटेल को स्वस्थ बताया। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को पटेल को जेल भेजने के पूर्व भंडारी अस्पताल प्रशासन ने एक औपचारिक पत्र लिखकर एमवाय प्रशासन से यह पूछा था कि क्या वे पटेल का इलाज या कोई जांच करना चाहते हैं। एमवाय अस्पताल द्वारा उत्तर में भेजे गए पत्र में ना कहते हुए यह भी लिखा गया कि हम पटेल का पूरा इलाज कर चुके हैं और अब उनकी किसी प्रकार की जांच बाकी नहीं है। पटेल एमवाय से डिस्चार्ज हो चुके हैं और अब उन्हें भर्ती करने का कोई औचित्य नहीं है।
कमल पटेल को आखिरकार शुक्रवार को जेल जाना पडा। हाल ही उनको हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी, कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। पटेल पर साक्ष्य छुपाने का आरोप है। सीबीआई ने दुर्गेश जाट हत्याकांड में साक्ष्य छुपाने के मामले में 19 मई को भोपाल से पटेल को गिरफ्तार किया था। उसके बाद पटेल को कोर्ट ने 3 जून तक सीआई जेल भेजने के आदेश दिए थे। उसी दिन से वह अस्पताल में भर्ती रहे।
संपत्ति की कीमतों में तेजी आ रही है। ऐसे में कई लोग आजकल संपत्ति में निवेश कर रहे हैं। मूल्यांकन आकर्षक हो तब संपत्ति बेची या दूसरी संपत्ति खरीदी जा सकती है या मुनाफावसूली की जा सकती है। विक्रम का स्थानांतरण मुम्बई से अपने गृहनगर भोपाल में हो रहा है। उन्होंने मुम्बई में 6 साल पहले एक घर खरीदा था। अब उन्होंने इसे बेचने में दिलचस्पी दिखाई है क्योंकि वे भोपाल में रहना चाहते हैं और उन्होंने इसके लिए एक खरीदार भी ढूंढ लिया है। वे इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं लेकिन उन्हें संपत्ति की बिक्री से जुड़े कर के विकल्पों के बारे में जानना है। जब संपत्ति की बिक्री की जाती है तो मुनाफा होने पर कर का भुगतान किया जाना चाहिए। संपत्ति के लेन-देन में सामान्य आयकर लागू नहीं होता बल्कि पूंजीगत लाभ कर लागू होता है। किसी संपत्ति के खरीद के 3 साल पूरा होने पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ लागू होता है। किसी संपत्ति के खरीदे जाने के 36 महीने के भीतर ही अगर इसकी बिक्री की जाती है तो इस पर अल्पावधि पूंजीगत लाभ लागू होता है। किसी व्यक्ति पर लागू होने लायक कर की दरों पर यह आधारित होता हैं। लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के लागू होने के बाद दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर 20 फीसदी है। मुद्रास्फीति के प्रभाव की भरपाई करने के लिए सूचकांक लागू होता है। कैसे हैं विकल्प : उनके पास यह विकल्प है कि वे 20 फीसदी पर कर का भुगतान करें और अच्छी योजना में निवेश करके बेहतर रिटर्न पाएं। अगर वे इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करते हैं और मिसाल के तौर पर वह दोहरे अंक को बरकरार रखने में सफल होंगे तो उन्हें करमुक्त रिटर्न मिलेगा। यह एक बेहतर विकल्प है क्योंकि उन्हें कर की बचत करने के लिए कम प्रतिफल वाली योजनाओं में निवेश करने की जरूरत नहीं है या दूसरी संपत्ति में निवेश करने के लिए बाध्य होने की जरूरत नहीं है। कई लोग किसी भी कीमत पर कर की बचत चाहते हैं। अगर विक्रम कर का भुगतान नहीं करना चाहते हैं तो वे पूंजीगत लाभ बॉन्ड में अपने फायदे की रकम का निवेश कर सकते हैं। इन बॉन्डों को ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी), नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) जैसी संस्थाएं जारी करती हैं। जैसे ही आपने संपत्ति की बिक्री कर दी उसके बाद इन बॉन्डों को खरीदने के लिए 6 महीने की अवधि होती है। फिलहाल इस पर करीब 6 फीसदी का प्रतिफल है और इसमें 3 साल की लॉक इन अवधि है। लेकिन इसमें दिक्कत इस बात की है कि विक्रम अगर इन योजनाओं में निवेश करके कर बचत में सफल भी रहते हैं तो वे कुछ खो रहे हैं क्योंकि इन बॉन्डों पर मिलने वाला ब्याज दर कम होता है। इसके अतिरिक्त इन बॉन्डों से होने वाली आय पर भी कर लगता है। कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में पूंजीगत लाभ बॉन्ड में ज्यादा से ज्यादा 50 लाख रुपए निवेश कर सकता है। हालांकि साल के 1 अक्टूबर के बाद अगर लेन-देन होता है तो यह विंडो अगले वित्त वर्ष के लिए भी हो जाता है और इसमें 1 करोड़ रुपए के निवेश की इजाजत होती है। विक्रम के पास कर बचत का दूसरा तरीका भी हो सकता है। वह पूंजीगत लाभ की कीमत के लिए दूसरी संपत्ति भी खरीद सकते हैं। यह आयकर कानून की धारा 54 के अंतर्गत आता है। ऐसी संपत्ति बिक्री के एक साल पहले या इसके 2 साल के भीतर ही खरीदी जा सकती है। किसी संपत्ति के निर्माण के मामले में बिक्री की तारीख से 3 साल के समय की इजाजत दी जाती है। इस बीच रिटर्न दाखिल करने की तारीख से पहले मुनाफे को पूंजीगत लाभ जमा खाता में जमा करने की जरूरत है। इस अवधि के बाद इस पूंजीगत लाभ के लिए इस्तेमाल न की जानी वाली रकम पर 3 साल की अवधि के खत्म होने के पहले साल में आयकर लगाया जाएगा। ऐसे में इसके कुछ हिस्से का इस्तेमाल संभव है। विक्रम यह भी जानना चाहते हैं कि मुंबई में अपने घर की बिक्री करके भोपाल में वे घर खरीद सकते हैं जहां उन्हें स्थानांतरण के बाद रहना है। देश के किसी भी हिस्से में खरीद की इजाजत है। इस बात को लेकर काफी अस्पष्टता की स्थिति है कि कोई किसी एक आवासीय संपत्ति में निवेश करे या इससे ज्यादा में। शर्तो को अच्छी तरह से पढ़कर यह समझना बेहद अच्छा होगा कि एक ही आवासीय संपत्ति में निवेश किया जाए। विक्रम के दोस्त गौरव की दूसरी दिक्कत है। उन्होंने व्यावसायिक संपत्ति की बिक्री की है और वे अपनी पूंजीगत लाभ कर में बचत करना चाहते हैं। यह आयकर कानून की धारा 54एफ के तहत संभव है। यह आवासीय संपत्ति के मुकाबले पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिए लागू है। कोई व्यक्ति सोने पर पूंजीगत लाभ की बचत कर सकता है जिसे पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर देखा जाता है। किसी आवासीय संपत्ति की बिक्री के मुकाबले इसमें एक बड़ा अंतर है। आवासीय संपत्ति की बिक्री के मामले में निवेश की समय अवधि समान रहेगी। हालांकि ऐसा तभी हो पाएगा जब मौलिक परिसंपत्ति के हस्तांतरण की तारीख के वक्त उनके पास एक से ज्यादा आवासीय संपत्ति न हो। अब यह विक्रम पर निर्भर करता है कि वे संपत्ति खरीदना और निवेश करना चाहते हैं या कर देना चाहते हैं। jagran 13/09/2010
जी हां यह मत सोचिए कि ब्याज दरें बढ़ने पर आपको सिर्फ नुकसान ही है। ब्याज दरें बढ़ने से उन्हें तो नुकसान होता है जो लोन लेते हैं क्योंकि बैंक उनके लिए ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। लेकिन उनका क्या जो बैंक में पैसे जमा कराते हैं।
जब बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की घोषणा करेंगे तो जाहिर है कि वह दोनो अवस्थाओं में लागू होगा। यानी बैंक में जमा किए जाने वाले धन पर अब ज्यादा ब्याज मिलेगा। इससे फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी कराने वालों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। उन्हे भी ज्यादा ब्याज मिलेगा। बचत खाते में हांलाकि ब्याज दरें काफी कम होती हैं फिर भी वहां खाताधरियों को फायदा होगा। इसका असर प्रॉविडेंट फंड या पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर भी पड़ता है और कई मामलों में वहां भी ब्याज दरें बढ़ जाती हैं। इसके अलाव लघु बचत योजनाओं पर भी ब्याज में बढ़ोतरी हो जाती है।
जब बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की घोषणा करेंगे तो जाहिर है कि वह दोनो अवस्थाओं में लागू होगा। यानी बैंक में जमा किए जाने वाले धन पर अब ज्यादा ब्याज मिलेगा। इससे फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी कराने वालों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। उन्हे भी ज्यादा ब्याज मिलेगा। बचत खाते में हांलाकि ब्याज दरें काफी कम होती हैं फिर भी वहां खाताधरियों को फायदा होगा। इसका असर प्रॉविडेंट फंड या पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर भी पड़ता है और कई मामलों में वहां भी ब्याज दरें बढ़ जाती हैं। इसके अलाव लघु बचत योजनाओं पर भी ब्याज में बढ़ोतरी हो जाती है।
मंगलवार को रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो और रिवर्स रेपो दोनो ही दरों को बढ़ा दिया है । इस नीति के अंतर्गत केन्द्रीय बैंक आगे की रणनीतिके बारे में दिशा निर्देश तय करता है। जिसके तहत वह रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट कोघटाता या बढ़ाता है। लेकिन आरबीआई के इन तकनीकी शब्दों के बारे में आम आदमी काज्ञान शून्य रहता है। आइए जानते हैं। क्या होती है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट औरक्यों जरुरत होती है इसे घटाने और बढ़ाने की।
रेपो रेट
आम आदमी कीतरह बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी कर्ज की जरुरत पड़ती है ऐसे में ये रिजर्वबैंक से शार्ट टर्म के लिए कर्ज लेते हैं। जिस ब्याज दर पर आरबीआई बैंकों औरवित्तीय संस्थानों को कर्ज देता है उसे रेपो रेट कहते है। जब बाजार में लिक्विडिटीज्यादा हो जाती है तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ा देता है जिससे आरबीआई से मिलने वालाकर्ज महंगा हो जाता है और बाजार में लिक्विडिटी में कमी आ जाती है। इससे महंगाई कोकाबू में करने में भी मदद मिलती है।
रिवर्स रेपो रेट
बैंकों औरवित्तीय संस्थानों के पास जब नगदी की अधिकता हो जाती है तो वो उसे आरबीआई को उधारदे देते हैं। जिस दर पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।महंगाई को काबू में करने के लिए भी रिवर्स रेपो रेट आरबीआई बढ़ा देता है जिससे बैंकबाजार में पैसा लगाने के बजाय आरबीआई के पास पैसा जमा करवाने में ज्यादा दिलचस्पीदिखाते हैं। 3/09/10
रेपो रेट
आम आदमी कीतरह बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी कर्ज की जरुरत पड़ती है ऐसे में ये रिजर्वबैंक से शार्ट टर्म के लिए कर्ज लेते हैं। जिस ब्याज दर पर आरबीआई बैंकों औरवित्तीय संस्थानों को कर्ज देता है उसे रेपो रेट कहते है। जब बाजार में लिक्विडिटीज्यादा हो जाती है तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ा देता है जिससे आरबीआई से मिलने वालाकर्ज महंगा हो जाता है और बाजार में लिक्विडिटी में कमी आ जाती है। इससे महंगाई कोकाबू में करने में भी मदद मिलती है।
रिवर्स रेपो रेट
बैंकों औरवित्तीय संस्थानों के पास जब नगदी की अधिकता हो जाती है तो वो उसे आरबीआई को उधारदे देते हैं। जिस दर पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।महंगाई को काबू में करने के लिए भी रिवर्स रेपो रेट आरबीआई बढ़ा देता है जिससे बैंकबाजार में पैसा लगाने के बजाय आरबीआई के पास पैसा जमा करवाने में ज्यादा दिलचस्पीदिखाते हैं। 3/09/10
Nai Dunia
Published in 05 Aug-2010
विदेशी पूँजी का महँगाई पर कहर
महँगाई का एक मुख्य और महत्वपूर्ण कारक विदेशी पूँजी है, जो पिछले दरवाजे से प्रवेश कर रही है। आज जिन शर्तों पर और जिन क्षेत्रों में विदेशी पूँजी भारत आ रही है, वे न तो हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल हैं और न ही हमारी आवश्यकताओं और लक्ष्यों को हासिल करने में सहयोगी हैं। डॉलर के मुकाबले रुपए की मजबूती ने निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।
हम उस दौर से गुजर रहे हैं जब ८.५ प्रतिशत आर्थिक विकास के दावे की चमक को महँगाई निस्तेज कर रही है। महँगाई पर हो रही बहसों में जो भी उपचार सुझाए गए, उनमें अधिकांश लक्षणों के आधार पर हैं, मूल कारणों के आधार पर नहीं । कभी घरेलू माँग का दबाव, कभी आपूर्ति की कमी, कभी ढीली मौद्रिक नीति तो कभी वैश्विक बाजारों की ऊँची कीमतों पर घरेलू महँगाई का दोष मढ़ा जाता रहा। जनसाधारण को न तो सरकार का दिसंबर के बाद महँगाई कम होने का आश्वासन आश्वस्त कर पाता है और न ही रिजर्व बैंक का आगामी कुछ महीनों में मुद्रास्फीति की दर ६ प्रतिशत रहने का आकलन भरोसा दिलाता है।
इन आश्वासनों और कारणों की खोज में यह भुला दिया गया कि महँगाई का एक मुख्य और महत्वपूर्ण कारक विदेशी पूँजी है, जो पिछले दरवाजे से प्रवेश कर रही है। यह प्रवेश अनिवासी भारतीयों द्वारा भेजी जा रही धनराशि, संस्थागत विदेशी निवेशक, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, व्यावसायिक विदेशी ऋण तथा सरकारी और अंतरराष्ट्रीय विदेशी संस्थाओं द्वारा दिए जा रहे ऋण के रूप में होता है। मार्च २००८ को समाप्त हुए १२ महीनों में १०७ अरब डॉलर की विदेशी पूँजी भारत में आई। उस समय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने मुख्य कठिनाई यह पेश हुई कि मुद्रा आपूर्ति कम करने के लिए वह तरलता वृद्धि कैसे निष्क्रिय करे। उसने डॉलर खरीदे, रुपए बेचे ताकि मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण महँगाई न बढ़े। विदेशी पूँजी का प्रवाह जारी रखने और मार्च २०१० को समाप्त हुए वर्ष तक ५४ अरब डॉलर की विदेशी पूँजी भारत में आई । दिलचस्प बात यह है कि उस समय सरकार के थोक मूल्य सूचकांक के आँकड़े मुद्रास्फीति में गिरावट के संकेत देते रहे लेकिन दूसरी ओर बाजार की मूल्य स्थिरता लुप्त होती गई । २००८ और २००९ में विदेशी पूँजी के कारण जो महँगाई बढ़ी, उसका जिद्दी स्वभाग २०१० में भी कायम रहा। ज्ञातव्य है कि २००९ में विदेशी संस्थागत निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से पच्चीस-पच्चीस अरब डॉलर की धनराशि ने भारत में प्रवेश किया ।
ऐसा भी नहीं कि विदेशी पूँजी द्वारा बाजार में किए जा रहे उत्पात से भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक पूर्णतः बेखबर थे। रिजर्व बैंक की विशेष चिंता इस बात को लेकर थी कि संस्थागत निवेशकों द्वारा सहभागिता और उपखातों के माध्यम से भारत में पूँजी आगम के रास्ते को कैसे बंद किया जाए। विदेशी पूँजी ने जहाँ एक ओर परिसंपत्ति मूल्य में असाधारण वृद्धि दर्ज की, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अस्थिरता भी पैदा की। सरकार और रिजर्व बैंक दोनों ही बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उतनी ही विदेशी पूँजी के भारत में प्रवेश करने की स्वीकृति दी जानी चाहिए, जिसका अवशोषण भारतीय अर्थव्यवस्था में हो सके। लेकिन यह केवल चिंता और कहासुनी की बात थी । नतीजा यह हुआ कि नए रास्तों से विदेशी पूँजी भारत में आती रही जिसका अवशोषण भारतीय अर्थव्यवस्था नहीं कर सकी। पिछले दिनों रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीतिगत सोच और सरकार के कार्य-व्यवहार में भारी विरोधाभास देखने में आया। एक तरफ तो सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में बाजारवाद को बढ़ावा देने के सारे प्रयास में जुटी रही है, जबकि दूसरी तरफ मुद्रा का प्रसार कम करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। यह सही है कि चालू खातों के घाटे को कम करने और घरेलू माँग को वित्तीय सहारा देने के लिए विदेशी पूँजी की आवश्यकता होती है, लेकिन हुआ यह कि अस्थिर और अस्पष्ट वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कारण केवल मुद्रास्फीति पर ही दबाव नहीं बढ़ा, बल्कि चालू खाते का घाटा भी ३८.४ अरब डॉलर हो गया ।
विदेशी व्यावसायिक कर्ज की विदेशी पूँजी पर ऊँची ब्याज की दरों ने भी महँगाई बढ़ाई जिसका नतीजा यह हुआ कि औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ती गई और पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति में औद्योगिक या विनिर्माण क्षेत्र का योगदान बढ़कर ७.९ प्रतिशत हो गया। मार्च २०१० के अंत में विदेशी व्यावसायिक ऋण ७१ अरब डॉलर का था जिसकी ऋण सेवा करीब १७ अरब डॉलर थी । पिछले दिनों जारी हुई विश्व खाद्य संगठन की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वायदा कारोबार में विदेशी पूँजी के प्रवेश के कारण पिछले दो वर्षों के दौरान दुनियाभर के खाद्य पदार्थों के दामों में जो भारी इजाफा हुआ है, उसमें अधिकांशः भूमिका सट्टेबाजी और वायदा बाजार की सट्टेबाजी की है। इतना ही नहीं, व्यावसायिक सेवाओं के नाम पर भारत से विदेशों को गत वर्ष २३ अरब डॉलर का भुगतान हुआ । उल्लेखनीय है कि २००९ में आई विदेशी पूँजी की राशि गत वर्ष से बढ़कर दोगुना हो गई , लेकिन यह पता नहीं कि इतनी विशाल राशि को कौन भेज रहा है और कौन प्राप्त कर रहा है। यह भी समझ से परे है कि वास्तुशिल्प या सलाहकार या विशेषज्ञ २३ अरब डॉलर की सेवाएँ विदेशों में देंगे। यह भी ज्ञात नहीं हो सका है कि इन व्यावसायिक सेवाओं का संचालन कौन कर रहा है और इसका कौन मालिक है। अमेरिका के पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवेश कपूर का तर्क है कि वास्तव में रिजर्व बैंक के पास आने वाली और जाने वाली पूँजी का कोई सूत्र नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी स्वयं स्वीकार करते हैं कि अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ-साथ अरबों डॉलर के आवागमन का आकलन नही हो पा रहा है। इसलिए चिंता का विषय यह भी है कि संभवतः २३ अरब डॉलर (अर्थात ७०० अरब रुपए) का उपयोग नशीले पदार्थों के व्यवसाय से प्राप्त काले धन को श्वेत मुद्रा में बदलने में हो रहा है। यह भी भय बना हुआ है कि इस राशि का एक भाग आतंकवादियों के वित्तीय पोषण के भी काम आ रहा हो । इसके बावजूद यह खोज का विषय है कि ७०० अरब रुपए की राशि बाजार में किन-किन क्षेत्रों में लगी हुई है। २३ अरब डॉलर का यह "ब्लैक बॉ
Published in 05 Aug-2010
विदेशी पूँजी का महँगाई पर कहर
महँगाई का एक मुख्य और महत्वपूर्ण कारक विदेशी पूँजी है, जो पिछले दरवाजे से प्रवेश कर रही है। आज जिन शर्तों पर और जिन क्षेत्रों में विदेशी पूँजी भारत आ रही है, वे न तो हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल हैं और न ही हमारी आवश्यकताओं और लक्ष्यों को हासिल करने में सहयोगी हैं। डॉलर के मुकाबले रुपए की मजबूती ने निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।
हम उस दौर से गुजर रहे हैं जब ८.५ प्रतिशत आर्थिक विकास के दावे की चमक को महँगाई निस्तेज कर रही है। महँगाई पर हो रही बहसों में जो भी उपचार सुझाए गए, उनमें अधिकांश लक्षणों के आधार पर हैं, मूल कारणों के आधार पर नहीं । कभी घरेलू माँग का दबाव, कभी आपूर्ति की कमी, कभी ढीली मौद्रिक नीति तो कभी वैश्विक बाजारों की ऊँची कीमतों पर घरेलू महँगाई का दोष मढ़ा जाता रहा। जनसाधारण को न तो सरकार का दिसंबर के बाद महँगाई कम होने का आश्वासन आश्वस्त कर पाता है और न ही रिजर्व बैंक का आगामी कुछ महीनों में मुद्रास्फीति की दर ६ प्रतिशत रहने का आकलन भरोसा दिलाता है।
इन आश्वासनों और कारणों की खोज में यह भुला दिया गया कि महँगाई का एक मुख्य और महत्वपूर्ण कारक विदेशी पूँजी है, जो पिछले दरवाजे से प्रवेश कर रही है। यह प्रवेश अनिवासी भारतीयों द्वारा भेजी जा रही धनराशि, संस्थागत विदेशी निवेशक, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, व्यावसायिक विदेशी ऋण तथा सरकारी और अंतरराष्ट्रीय विदेशी संस्थाओं द्वारा दिए जा रहे ऋण के रूप में होता है। मार्च २००८ को समाप्त हुए १२ महीनों में १०७ अरब डॉलर की विदेशी पूँजी भारत में आई। उस समय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने मुख्य कठिनाई यह पेश हुई कि मुद्रा आपूर्ति कम करने के लिए वह तरलता वृद्धि कैसे निष्क्रिय करे। उसने डॉलर खरीदे, रुपए बेचे ताकि मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण महँगाई न बढ़े। विदेशी पूँजी का प्रवाह जारी रखने और मार्च २०१० को समाप्त हुए वर्ष तक ५४ अरब डॉलर की विदेशी पूँजी भारत में आई । दिलचस्प बात यह है कि उस समय सरकार के थोक मूल्य सूचकांक के आँकड़े मुद्रास्फीति में गिरावट के संकेत देते रहे लेकिन दूसरी ओर बाजार की मूल्य स्थिरता लुप्त होती गई । २००८ और २००९ में विदेशी पूँजी के कारण जो महँगाई बढ़ी, उसका जिद्दी स्वभाग २०१० में भी कायम रहा। ज्ञातव्य है कि २००९ में विदेशी संस्थागत निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से पच्चीस-पच्चीस अरब डॉलर की धनराशि ने भारत में प्रवेश किया ।
ऐसा भी नहीं कि विदेशी पूँजी द्वारा बाजार में किए जा रहे उत्पात से भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक पूर्णतः बेखबर थे। रिजर्व बैंक की विशेष चिंता इस बात को लेकर थी कि संस्थागत निवेशकों द्वारा सहभागिता और उपखातों के माध्यम से भारत में पूँजी आगम के रास्ते को कैसे बंद किया जाए। विदेशी पूँजी ने जहाँ एक ओर परिसंपत्ति मूल्य में असाधारण वृद्धि दर्ज की, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अस्थिरता भी पैदा की। सरकार और रिजर्व बैंक दोनों ही बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उतनी ही विदेशी पूँजी के भारत में प्रवेश करने की स्वीकृति दी जानी चाहिए, जिसका अवशोषण भारतीय अर्थव्यवस्था में हो सके। लेकिन यह केवल चिंता और कहासुनी की बात थी । नतीजा यह हुआ कि नए रास्तों से विदेशी पूँजी भारत में आती रही जिसका अवशोषण भारतीय अर्थव्यवस्था नहीं कर सकी। पिछले दिनों रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीतिगत सोच और सरकार के कार्य-व्यवहार में भारी विरोधाभास देखने में आया। एक तरफ तो सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में बाजारवाद को बढ़ावा देने के सारे प्रयास में जुटी रही है, जबकि दूसरी तरफ मुद्रा का प्रसार कम करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। यह सही है कि चालू खातों के घाटे को कम करने और घरेलू माँग को वित्तीय सहारा देने के लिए विदेशी पूँजी की आवश्यकता होती है, लेकिन हुआ यह कि अस्थिर और अस्पष्ट वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कारण केवल मुद्रास्फीति पर ही दबाव नहीं बढ़ा, बल्कि चालू खाते का घाटा भी ३८.४ अरब डॉलर हो गया ।
विदेशी व्यावसायिक कर्ज की विदेशी पूँजी पर ऊँची ब्याज की दरों ने भी महँगाई बढ़ाई जिसका नतीजा यह हुआ कि औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ती गई और पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति में औद्योगिक या विनिर्माण क्षेत्र का योगदान बढ़कर ७.९ प्रतिशत हो गया। मार्च २०१० के अंत में विदेशी व्यावसायिक ऋण ७१ अरब डॉलर का था जिसकी ऋण सेवा करीब १७ अरब डॉलर थी । पिछले दिनों जारी हुई विश्व खाद्य संगठन की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वायदा कारोबार में विदेशी पूँजी के प्रवेश के कारण पिछले दो वर्षों के दौरान दुनियाभर के खाद्य पदार्थों के दामों में जो भारी इजाफा हुआ है, उसमें अधिकांशः भूमिका सट्टेबाजी और वायदा बाजार की सट्टेबाजी की है। इतना ही नहीं, व्यावसायिक सेवाओं के नाम पर भारत से विदेशों को गत वर्ष २३ अरब डॉलर का भुगतान हुआ । उल्लेखनीय है कि २००९ में आई विदेशी पूँजी की राशि गत वर्ष से बढ़कर दोगुना हो गई , लेकिन यह पता नहीं कि इतनी विशाल राशि को कौन भेज रहा है और कौन प्राप्त कर रहा है। यह भी समझ से परे है कि वास्तुशिल्प या सलाहकार या विशेषज्ञ २३ अरब डॉलर की सेवाएँ विदेशों में देंगे। यह भी ज्ञात नहीं हो सका है कि इन व्यावसायिक सेवाओं का संचालन कौन कर रहा है और इसका कौन मालिक है। अमेरिका के पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवेश कपूर का तर्क है कि वास्तव में रिजर्व बैंक के पास आने वाली और जाने वाली पूँजी का कोई सूत्र नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी स्वयं स्वीकार करते हैं कि अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ-साथ अरबों डॉलर के आवागमन का आकलन नही हो पा रहा है। इसलिए चिंता का विषय यह भी है कि संभवतः २३ अरब डॉलर (अर्थात ७०० अरब रुपए) का उपयोग नशीले पदार्थों के व्यवसाय से प्राप्त काले धन को श्वेत मुद्रा में बदलने में हो रहा है। यह भी भय बना हुआ है कि इस राशि का एक भाग आतंकवादियों के वित्तीय पोषण के भी काम आ रहा हो । इसके बावजूद यह खोज का विषय है कि ७०० अरब रुपए की राशि बाजार में किन-किन क्षेत्रों में लगी हुई है। २३ अरब डॉलर का यह "ब्लैक बॉ
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